शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

इमरान खान ने यूएन के मंच से दी भारत को युद्ध की धमकी


संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने वर्ल्ड वॉर की धमकी दी है. इमरान खान ने कहा कि हम भारत से सात गुना ज्यादा कमजोर देश हैं लेकिन अगर हमें दबाया गया तो एक ना एक दिन हमें हथियार उठाना ही पड़ेगा और अगर दो परमाणु संपन्न देशों में युद्ध होता है तो इसकी आंच सिर्फ दो देशों तक ही सीमित नहीं रहेगी. इमरान खान ने कश्मीर का जिक्र छेड़ते हुए कहा कि कश्मीर की 80 लाख जनता को जानवरों की तरह 55 दिनों से घर में कैद करके रख दिया गया है.

इमरान खान ने कहा कि क्या भारत सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी ने कभी सोचा कि जब कश्मीर से कर्फ्यू हटेगा तब क्या होगा? क्या कश्मीरी चुपचाप बैठेंगे? हजारों कश्मीरी पिछले सालों में मारे गए हैं. 11000 महिलाओं का बलात्कार हुआ है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट है.

कोई कुछ नहीं करता क्योंकि भारत बड़ा बाजार है लेकिन इसके गंभीर परिणाम होंगे. कर्फ्यू हटने के बाद कश्मीर में खून की नदियां बहेंगी. क्या भारत सरकार ने सोचा है कि तब क्या होगा. क्या होगा जब खून की नदियां बहेगी? कश्मीरी लोगों पर इसका क्या असर होगा? कश्मीरियों को 55 दिनों से जानवरों की तरह बंद किया गया है.

उन्होंने कहा कि 13000 कश्मीरी लड़कों को भारतीय सेना उठाकर पता नहीं कहा ले गई है. इमरान खान ने धमकी भरे लहजे में कहा कि भारत में एक बार फिर पुलवामा जैसा हमला होगा और एक बार भारत फिर हमपर आरोप लगाएगा. इमरान खान ने कहा कि भारत के हिंदू क्या नहीं देख रहे कि कश्मीरियों के साथ क्या हो रहा है. कश्मीर में ये सबकुछ इसलिए हो रहा है क्योंकि कश्मीर में मुसलमान हैं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि ये बहुत ही संवेदनशील समय है. पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. दो न्यूक्लियर संपन्न देश एक दूसरे की तरफ युद्ध की तरफ बढ़ेंगे. यूएन की जिम्मेदारी है, इसलिए 1945 की स्थापना हुई थी. आपकी जिम्मेदारी है कि युद्ध को रोकें. क्या आप बाजार के लिए खड़े होंगे या मानवता और जस्टिस के लिए खड़े होंगे. इमरान खान ने कहा कि हमारे पास दो ऑप्शन हैं कि हम चुपचाप मान जाएं या लड़े और जब मैं ये सवाल खुद से पूछता हूं तो ये पता है कि हम लड़ेंगे
बजरंग राजपुरोहित भामटसर 

बुधवार, 25 सितंबर 2019

बीकानेर-नागौर हाइवे का अटका काम निर्णायक मोड़ पर:- बिश्नोई


नोखा 25 सितम्बर । भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मत्रांलय, भारत सरकार से स्वीकृत नेशनल हाइवे नं. 89 का बीकानेर से नागौर तक का अटका कार्य आज महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है । जिससे निकट भविष्य में यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट फिर से शुरू हो सकेगा । यह जानकारी नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने आज प्रेस को जारी बयान में दी । विधायक बिश्नोई ने बताया कि इस सड़क का निर्माण कार्य ठेकेदार फर्म जीवीआर की खराब वित्तीय स्थिति के कारण बीच में ही अटक गया था तथा इसके फिर से शुरू करने की सभी कोशिशें बेकार हो चली थी । केन्द्र सरकार के भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा गडकरी फाॅर्मूला वन टाइम सैटलमेंट (ओटीएस) के लिए आज से पूर्व आठ बैठकें की गई थी, किन्तु संबंधित ठेकेदार फर्म एवं उसे वित्तपोषित करने वाली बैंकों और सरकार के बीच सहमति नहीं बन पाई थी । लेकिन कल 4 सितम्बर को नौंवी बैठक में त्रिपक्षीय समझौते पर सहमति बन गई ।
विधायक बिश्नोई ने बताया कि केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के जोन द्वितीय के एडीजी एसएस नाहर के नेतृत्व में आयोजित बैठक में श्री अश्विनी कुमार मुख्य अभियन्ता क्षेत्रीय कार्यालय केन्द्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार, श्री अनुप कुलश्रैष्ठ मुख्य अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग राजस्थान के प्रतिनिधि के रूप में डीपी  सोनी अधीक्षण अभिंयता NH PWD बीकानेर , जीवीआर कंसेसियनार (ठेकेदार कम्पनी) नागौर-बीकानेर प्रोजेक्ट के प्रतिनिधि, कंपनी को फंडिग करने वाली बैंकों (कैनरा बैंक, बैंक आॅफ महाराष्ट्र, सिंडिकेट बैंक) के प्रतिनिधि मौजूद रहे ।
विधायक बिश्नोई ने बताया कि यह वन टाइम सैटलमेंट ट्रांसपोर्ट भवन के कमरा नं. 212 एडीजी जाॅन द्वितीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के कार्यालय में उनकी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ । जिसमें वन टाइम सैटलमेंट के अन्तर्गत ठेकेदार फर्म एवं फर्म को वित्तपोषित करने वाली तीनों बैंकों को एकमुश्त 108 करोड़ रूपये भारत सरकार ने देने तय किये तथा इस ठेकेदार कम्पनी को इस काम से अलग कर दिया गया। उन्होने कहा कि बीकानेर से नागौर तक का नेशनल हाइवे नं. 89 जो 110 किमी. लम्बा है इस हाइवे के निर्माण के साथ-साथ 4 आरओबी पलाना, देशनोक, चीलो व अलाय और दो बाईपास नोखा व श्रीबालाजी भी बनने है। जिससे दोनों जिलों की लाखों की आबादी और लाखों ट्रांसपोटर्रो को फायदा होगा। क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी ।
इस महत्वपूर्ण कार्य में जनवरी 2018 से 4 सितम्बर 2019 तक लम्बे प्रयास के बाद अब सफलता मिली है ।
इसमें माननीय अर्जुनराम मेघवाल सांसद बीकानेर व केन्द्रीय भारी उद्योग एंव संसदीय कार्य मंत्री भारत सरकार, माननीय नितिन गडकरी जी भुतल परिवहन मंत्री भारत सरकार, माननीय मनसुख भाई माण्डविया तत्कालीन राज्यमंत्री भूतल परिवहन मंत्री भारत सरकार और मत्रांलय के अधिकारियों श्री एसएस नाहर, श्री अश्विनी कुमार, श्री मलिक पूर्व सचिव मोर्थ (MORTH) तथा मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग राजस्थान श्री अनुप कुलश्रैष्ठ व उनके अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । मैं विधायक के नाते इन सभी महानुभावों का धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ ।

शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

नोखा का इतिहास बजरंग राजपुरोहित के साथ


नोखा नगर की स्थाणपना वर्ष् 1927 में की गई थी। वर्तमान मण्डी जहाँ मुख्य नगर स्थित है को मण्डी टाउन के तौर पर आधुनिक व आधारभूत सुविधाओं सहित विकसित करने में तत्कालीन बीकानेर राज्य के महाराजा श्री गंगासिंह जी व मुख्य फ्रांसीसी इ्ंजीनियर वास्तुकार श्री मैकेंजी का महत्वेपूर्ण योगदान रहा, जिन्होनें इसे ग्रिड-आयरन पद्धति से बसाया। इस नगर में सभी सडकें व गलियाँ आपस में समकोण पर मिलती हैं। मुख्य चौडी सडकों के मिलन स्थल पर चौक रखे गये हैं। थार रेगिस्‍तान का हिस्सा होने के कारण यहाँ रेत के टीले हैं व गर्मियों में रेतीली आँधियाँ चलती हैं। यहाँ की जलवायु शुष्का व गर्म है। तापमान के उतार-चढाव में बहुत अन्तर पाया जाता है। रेतीली आँधियों के कारण कभी-कभी सडक व रेल-मार्ग अवरूद्ध हो जाते हैं, परन्तु मिटटी के तुरन्त हटाए जाने व जंगल आदि में पौधारोपण किये जाने के कारण इसमें काफी कमी आई है। नोखा, पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर जिले एवं संभागीय मुख्यालय में स्थित एक उपखण्ड व तहसील मुख्यालय है, जो 27033’ उत्तरी अक्षांश से 73028 पूर्वी देशान्तर पर स्थित है। यह बीकानेर सम्भाग के दक्षिण में बीकानेर शहर से लगभग 65 किलोमीटर व नागौर शहर से 50 किमी की दूरी पर है। नोखा नजदीक के एक गाँव सोमलसर के धनिक श्री सुगनचन्द पारख के प्रयासों से स्थापित किया गया था, जिसकी मुख्य योजना तत्कालीन बीकानेर स्टेट के फ्रांसीसी इंजीनियर ’’मिस्टर मैकेंजी’’ ने तैयार की थी। यह रेल एवं सड़क मार्ग दोनों के द्वारा राज्य के प्रमुख शहरों से जुड़ा है। यह राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 89 पर स्थित है।
थार रेगिस्तान का हिस्सा होने के कारण यहाँ रेत के टीले हैं एवं गर्मियों में रेतीली आंधियाँ चलती हैं। यहाँ की जलवायु शुष्क एवं गर्म है। तापमान के उतार-चढ़ाव में बहुत अंतर पाया जाता है। रेतीली आँधियों के कारण कभी-कभी सड़क व रेल मार्ग अवरूद्ध हो जाते हैं, परन्तु मिट्टी के तुरन्त हटाये जाने व जंगल आदि में पौधारोपण किये जाने के कारण इसमें काफी कमी आई है। नोखा नगर की स्थापना वर्ष 1927 में की गई थी। वर्तमान मण्डी जहाँ मुख्य नगर स्थित है को मण्डी टाऊन के तौर पर आधुनिक व आधारभूत सुविधाओं सहित विकसित करने में तत्कालीन बीकानेर राज्य के महाराजा श्री गंगासिंह जी व मुख्य फ्रांसीसी इंजीनियर वास्तुकार श्री मैकंजी का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होनें इसे ग्रिड-आयरन पद्धति से बसाया। इस नगर में सभी सड़कें व गलियाँ आपस में समकोण पर मिलती हैं। मुख्य चैड़ी सड़कों के मिलन स्थल पर चैक रखे गये हैं।
नोखा नगर को नोखा मण्डी के नाम से भी जाना जाता है। बीकानेर सम्भाग के दक्षिणी भाग में यह एक मात्र मण्डी है। नोखा शहर औद्योगिक दृष्टि से अग्रणीय मण्डी है। नोखा में बिजली के तार, बल्ब, पंखे, गम व हल्की रजाईयाँ इत्यादि भी बनाई जाती हैं जो आस पास के इलाकों में काफी प्रसिद्ध हैं। यहाँ पर काफी औद्योगिक इकाईयाँ स्थापित हैं। यहाँ की रजाईयाँ विश्वविख्यात है। नोखा काफी तेजी से विकसित होता कस्बा है जो नगर के तौर पर विकसित होने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। वर्ष 1951 में यहाँ जनसंख्या मात्र 4557 थीं जो वर्ष 2001 में 67,214 व वर्ष 2010 में बढ़कर अनुमानित 86,790 हो चुकीं हैं। इसके विकास एवं विकास की संभावनाओं, कच्ची बस्तियों का फैलाव, अवैध निर्माण, अव्यवस्थित व अनियोजित विकास को ध्यान में रखकर इसका प्रथम मास्टर प्लान वर्ष 1981 में तैयार किया गया था। बड़े कस्बों/नगरों/शहरों में गाँवों से आबादी के पलायन को रोकने हेतु सरकार द्वारा समय-समय पर कदम उठाये जाते रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार द्वारा आई.डी.एस.एम.टी. आदि योजनाओं को स्वीकृत कर ऋण/अनुदान के द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके तहत नोखा में 2 आवासीय व 2 वाणिज्यिक योजनाएं विकसित की गईं हैं।
नोखा शहर राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 89 पर स्थित होने के कारण इस सड़क पर वर्कशाप व आटो पार्ट्स की दुकानों पर ट्रक सदैव खड़े रहकर मरम्मत कार्य करवाते है, जिससे स्थानीय व बाहरी यातायात में अवरोध पैदा होता है एवं सड़क मार्ग संकड़ा व भीड़ भरा रहता है। इसके अतिरिक्त यहाँ कोई ट्रक स्टेण्ड भी नहीं है। शहर में अधिकांश भवन बिना सैट बैक्स के निर्मित हैं, जिनमें पार्किंग हेतु कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। शहर की सारी पार्किंग सड़कों पर की जाती है। औद्योगिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों में सड़कों पर कब्जे कर उनकी वास्तविक चैड़ाई कम कर दी गयी है, जिनकी वजह से यहाँ पर सुगम यातायात के दृष्टिकोण से काफी समस्या रहती है। पुराने एवं अनधिकृत रूप से बसी बस्तियों में पार्किंग का अभाव है।
अतः उपर्युक्त सभी कारणों से उत्पन्न समस्याओं का हल ढंूढने एवं नगर के भावी विकास को सही दिशा देने के लिए वर्ष 1981 में राज्य सरकार द्वारा मास्टर प्लान स्वीकृत किया गया था। राष्ट्रीय नियोजन नीति में छोटे व मध्यम दर्ज के नगरों के विकास और इनमें रह रही बड़ी जनसंख्या को महत्व दिया जा रहाहै।

वर्ष 1892 में नोखा नगर में रेल लाईन बिछाई गई थी तथा वर्ष 1904 मे फ्लैग स्टेशन का निर्माण किया गया, जो वर्तमान रेलवे स्टेशन के उत्तर में 2 किलोमीटर पहले था, परन्तु अत्यधिक ढाल होने की वजह से इसे दक्षिण मे वर्तमान स्थल पर लाया गया। जिसका निर्माण वर्ष 1915 में हुआ था। धीरे-धीरे रेलवे स्टेशन के चारों ओर छितरे हुए मकान बनने शुरू हो गए। वर्ष 1927 में सोमलसर गाँव के स्व. श्री सुगन चन्द जी की सलाह पर तत्कालीन महाराजा श्री गंगासिंह जी ने नोखा मण्डी कस्बे की स्थापना की। यद्यपि तत्कालीन बीकानेर स्टेट के सार्वजनिक निर्माण विभाग के अभियंता मिस्टर मैकंेजी द्वारा कस्बे का नक्शा तैयार किया गया लेकिन स्व. श्री सुगनचन्द पारख का इसमें सराहनीय योगदान रहा जिन्हें महाराजा द्वारा कस्बे का चैधरी नियुक्त किया गया था। नोखा कस्बे के विकास को दृष्टिगत रखते हुए रोड़ा गाँव के ठाकुर से 700 एकड़ जमीन इस हेतु अधिगृहीत कर, रेलवे लाईन के पश्चिम में ग्रिड आयरन पद्धति से कस्बे का नक्शा तैयार किया गया, जिसमें रेलवे स्टेशन के समीप वाणिज्यिक क्षेत्र (मण्डी) को चिन्हित किया गया। समग्र आबादी को जाति समूह के आधार पर रखकर रिहायशी क्षेत्रों की स्थापना की गई तथा निश्चित जाति समूह के अनुसार उनके समूह के नाम पर सभी चैक का नामकरण किया गया।
शुरूआत में अनाज मण्डी क्षेत्र व इसके आस-पास 1600 वर्गगज के 100 भू-खण्डां का आवंटन किया गया जिसमें से 50 भूखण्डों पर तुरन्त निर्माण कार्य शुरू हा गया। इसी समय एक कुआं ’’राजवाला कुआं’’ तथा एक कुण्ड की खुदाई भी शुरू कराई गई जो कि अनाज मण्डी के उत्तर में है। मण्डी के दक्षिण में ’’ पुरानी धर्मशाला ’’ के नाम से एक धर्मशाला का निर्माण भी कराया गया। वर्ष 1940 में नोखा-बीकानेर तथा वर्ष 1943 में नोखा-सीकर को जोड़ने वाली सड़क का अकाल राहत कार्यों के अंतर्गत निर्माण कराया गया। वर्ष 1947 आते-आते शेष 50 भूखण्डों पर भी निर्माण कार्य शुरू हो गया। इसी समय उत्तर में बीकानेर रोड पर चिकित्सालय जो उस समय प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र था, प्राथमिक विद्यालय व पुलिस चैकी की भी स्थापना की गई।
वर्ष 1943 में इसे तहसील का दर्जा मिला तथा इसके विकास हेतु तहसीलदार की अगुवाई में नगर विकास समिति का गठन किया गया। जिसका कार्यकाल वर्ष 1959 तक रहा। बाद में इसका कार्य नवगठित नगर पालिका के सुपुर्द कर दिया गया।



नोखा की माध्य समुद्र तल से ऊँचाई 317 मीटर है तथा यह 270 33’ उत्तरी अक्षांश से 730 28’ पूर्वी देशान्तर पर स्थित है। जिला मुख्यालय बीकानेर से इसकी दूरी लगभग 65 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 89 नगर के मध्य से गुजरती है, जो बीकानेर-जोधपुर को आपस में जाड़ती है। इस नगर के पूर्वी दिशा में राज्य राजमार्ग संख्या 20 से यह शहर सीकर से जुड़ा है। ब्राडग्रेज रेल लाईन इस शहर के मध्य से गुजरती है, जो इसे राज्य के मुख्य शहरों के अतिरिक्त देश के प्रमुख शहरों से भी जोड़ती है। थार रेगिस्तान में बसा होने के कारण यहाँ की जलवायु लगभग सम्पूर्ण वर्ष गर्म और शुष्क रहती है तथा यहाँ के तापमान में काफी भिन्नता रहती है। यहाँ पर गर्मियों एवं सर्दियों में औसत तापमान में 420 सेण्टीग्रेड से 450 सेण्टीग्रेड तथा 200 सेण्टीग्रेड से 220 सेण्टीग्रेड के मध्य रहता है। यहाँ पर अधिकतम तापमान गर्मियों में 47.20 सेण्टीग्रेड तथा न्यूनतम तापमान सर्दियों में 4.40 सेण्टीग्रेड रहता है। राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भाग में धूल भरी आँधियाँ आती हैं, जो कि इस भू-भाग की सामान्य विशेषता है। हवा की दिशाएं मुख्य रूप से अप्रेल से सितम्बर तक दक्षिण-पश्चिम से तथा अक्टूबर से मार्च तक उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व की ओर से होती है। तापमान मे अत्यधिक उतार-चढाव के मुख्य कारण से यहाँ का मौसम गर्म और शुष्क रहता है। यहाँ मानसून का आना अनिश्चित रहता है। यहाँ पर औसत वार्षिक वर्षा लगभग 377 मिलीमीटर रहती है तथा औसत आर्द्रता 60 प्रतिशत रहती है।
लेखक- बजरंग राजपुरोहित भामटसर  Email - bjprajpurohit1993@gmail.com

शुक्रवार, 13 सितंबर 2019

राजस्थान गुजरात बोर्डर पुलिस डाकुओं से भी खतरनाक 

आबुरोङ राजस्थान और अमीरगढ गुजरात चैक पोस्ट पर पुलिलवाले डाकुओं की भांती धाक लगाये बैठे रहते है 50 रुपये 10 रुपये और 100 रुपये में अपना ईमान खुलेआम बैच रहे हैं ऊपरी अधिकारी मौन है देखे विडीयो बजरंग राजपुरोहित 

रविवार, 8 सितंबर 2019

इसरो प्रमुख शिवन के आंसू बेकार नहीं जाएंगे चांद की सतह पर विक्रम लेंडर का पता चला अब भी हो सकता है चमत्कार।



चांद पर पहुंचने की भारत की ख्वाहिश अब भी पूरी हो सकती है। 8 सितम्बर को चन्द्रयान-2 के ऑर्बिटर ने विक्रम लेंडर का पता लगा लिया है। ऑर्बिटर ने विक्रम लेंडर की थर्मल इमेज इसरो को भेजी है। विक्रम लेंडर चांद के चारों ओर लगातार चक्कर लगा रहा है। इसी दौरान ऑर्बिटर ने लापता हुए विक्रम लेंडर को खोज निकाला है। विक्रम लेंडर का पता लगते ही इसरो के वैज्ञानिकों के चेहरे खिल उठे हैं। इसरो प्रमुख के शिवन ने ही बताया कि ऑर्बिटर ने जो इमेज भेजी है वह बहुत ही उत्साहवर्धक है। हालांकि अभी विक्रम लेंडर और ऑर्बिटर के बीच सम्पर्क नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि किसी भी क्षण दोनों मे ंसम्पर्क हो सकता है। यदि ऑर्बिटर का सम्पर्क विक्रम लेंडर से हो गया तो चांद पर पहुंचने का भारत का सपना पूरा हो जाएगा। 6 सितम्बर की रात को इसरो प्रमुख के शिवन की आंखों में तब आंसू आ गए थे, जब ऑर्बिटर से अलग होने के बाद विक्रम लेंडर लापता हो गया। इसरो के प्लान के अनुसार विक्रम लेंडर को ऑर्बिटर से अलग होने के बाद चांद की सतह पर उतरना था और फिर विक्रम लेंडर में से प्रज्ञान को बाहर आना था। प्रज्ञान ही चांद की सतह पर तिरंगा बनाता और फिर विक्रम लेंडर की मदद से चांद के वातावरण, भूमि आदि की जानकारी ऑर्बिटर के माध्यम से इसरो तक भेजता। इसरो के वैज्ञानिकों का सम्पर्क ऑर्बिटर से तो है, लेकिन विक्रम लेंडर और प्रज्ञान से नहीं। विक्रम लेंडर और प्रज्ञान को इसरो के डेटा के मुताबिक की काम करना है। यानि चांद की सतह पर पहुंचने के बाद विक्रम लेंडर पर इसरो का कोई नियंत्रण नहीं है। अब यदि प्लान के अनुसार विक्रम लेंडर का सम्पर्क ऑर्बिटर से हो जाता है तो इसरो का मिशन पूरा हो जाएगा। यानि के शिवन के आंसू बेकार नहीं जाएंगे। विक्रम लेंडर के लापता होने के बाद के शिवन का कहना रहा कि चन्द्रयान-2 ने 99 प्रतिशत सफलता हासिल कर ली है। शिवन ने कहा कि आगामी 14 दिनों तक विक्रम लेंडर और ऑर्बिटर के बीच सम्पर्क हो सकता है, इसलिए इसरो के वैज्ञानिकों ने अभी हिम्मत नहीं हारी है। सब जानते हैं कि छह सितम्बर की रात को वैज्ञानिकों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे। विक्रम लेंडर के लापता होने के बाद मोदी ने भी कहा था जल्द ही हमें खुशखबरी सुनने को मिलेगी। इसे प्रधानमंत्री का वैज्ञानिकों के प्रति भरोसा ही कहा जा सकता है, कि उन्हें अभियान के विफल होने की उम्मीद नहीं थी। भारतवासियों के लिए यह खुशखबरी है कि अब हमे चांद पर पहुंच रहे हैं। भारतीय संस्कृति में चांद का बहुत महत्व माना गया है। हिन्दू तिथियों की गणना तो चांद से ही होती है। इसी प्रकार मुस्लिम समुदाय के पर्व भी चांद से ही निर्धारित होते हैं। यानि हिन्दू और मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं चांद से जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि भारत के 130 करोड़ लोगोंका सपना पूरा होता है तो यह बहुत बड़ी सफलता होगी।

संवाददाता  बजरंग राजपुरोहित 

इमरान खान ने यूएन के मंच से दी भारत को युद्ध की धमकी संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान...